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दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे से गया कैसे पहुँचें: पूरी गाइड

दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु और पुणे से गया जी पहुँचने का सबसे तेज़ और सस्ता रास्ता। ट्रेन, वंदे भारत, फ्लाइट, समय और खर्च की शहर-वार तुलना देखें।

दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु और पुणे से गया कैसे पहुँचें: शहर-वार पूरी गाइड

अंतिम अपडेट: 22 सितंबर 2026 • पितृपक्ष 2026 (26 सितंबर – 10 अक्टूबर) के लिए तैयार

गया जी पहुँचने का सबसे अच्छा रास्ता हर शहर से अलग है। कोलकाता से आप वंदे भारत से कुछ ही घंटों में पहुँच जाते हैं, दिल्ली से सीधी फ्लाइट और डेली ट्रेन दोनों हैं, जबकि बेंगलुरु और पुणे से कोई आसान सीधा साधन नहीं है। इसलिए एक ही सलाह सबके लिए काम नहीं करती।

इस गाइड में चारों शहरों के लिए अलग-अलग सबसे तेज़, सबसे सस्ता और सबसे आरामदायक रास्ता दिया गया है, समय और खर्च के अनुमान के साथ। नीचे अपना शहर चुनिए और सीधे उसी हिस्से पर पहुँच जाइए।

चारों शहरों की तुलना एक नज़र में

शहरगया तक दूरी (रेल)सीधी ट्रेनसीधी फ्लाइटसबसे तेज़ रास्ता
दिल्लीलगभग 990 किमीहाँ, रोज़ानाहाँ (गया एयरपोर्ट)फ्लाइट, लगभग 2 घंटे
कोलकातालगभग 460 किमीहाँ, वंदे भारत सहितहाँ (गया एयरपोर्ट)वंदे भारत, लगभग 5 घं. 40 मि.
बेंगलुरुलगभग 1,900+ किमीनहींनहींपटना की फ्लाइट + कैब
पुणेलगभग 1,750 किमीहाँ, पर साप्ताहिकनहींपटना की फ्लाइट + कैब

दिल्ली से गया कैसे पहुँचें

रेल दूरी लगभग 990 किमी • सबसे ज़्यादा विकल्प इसी शहर से
सीधा फैसला: समय कम है तो दिल्ली–गया की सीधी फ्लाइट लें, जो करीब 2 घंटे में पहुँचा देती है। बजट में यात्रा करनी है तो महाबोधि एक्सप्रेस (12397) सबसे भरोसेमंद है, जो रोज़ चलती है।

ट्रेन से

महाबोधि सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12397/12398) इस रूट की सबसे मशहूर ट्रेन है। यह नई दिल्ली और गया जंक्शन के बीच रोज़ाना चलती है, करीब 992 किलोमीटर की दूरी औसतन 14 घंटे 15 मिनट में पूरी करती है और रास्ते में सिर्फ 14 ठहराव लेती है। इसमें स्लीपर, AC थ्री-टियर, AC टू-टियर और जनरल कोच मिलते हैं, और इसमें आधुनिक LHB कोच लगे हैं।

इसके अलावा दिल्ली से गया के लिए ये विकल्प भी हैं:

  • गया–आनंद विहार गरीब रथ: साप्ताहिक, कम किराए में AC यात्रा का अच्छा विकल्प।
  • पूर्वा एक्सप्रेस (12381/12382): यह गया होकर चलने वाली ट्रेन है और सप्ताह में तीन दिन चलती है।
  • हावड़ा–नई दिल्ली राजधानी (12301/12302, वाया गया): यह राजधानी गया होकर गुज़रती है, इसलिए दिल्ली से गया तक भी इसमें बुकिंग की जा सकती है।

फ्लाइट से

गया एयरपोर्ट की जो गिनी-चुनी घरेलू उड़ानें हैं, उनमें दिल्ली सबसे प्रमुख है। एयर इंडिया और इंडिगो, दोनों दिल्ली–गया रूट पर उड़ान भरती हैं। एयरपोर्ट गया शहर से करीब 12 किमी और बोधगया से सिर्फ 5 किमी दूर है, इसलिए उतरते ही आप तीर्थ क्षेत्र में होते हैं।

दिल्ली वालों के लिए सबसे अच्छा प्लान: सुबह की फ्लाइट लेकर दोपहर तक गया पहुँचें, उसी शाम फल्गु तट और विष्णुपद के दर्शन कर लें, और अगली सुबह पिंडदान की विधि शुरू करें। लौटते समय ट्रेन ले लें, जिससे किराया भी संतुलित रहेगा।

कोलकाता से गया कैसे पहुँचें

रेल दूरी लगभग 460 किमी • चारों शहरों में सबसे आसान
सीधा फैसला: हावड़ा–गया वंदे भारत एक्सप्रेस (22303/22304) लीजिए। यह लगभग 459 किमी की दूरी करीब 5 घंटे 40 मिनट में तय करती है और सप्ताह में छह दिन चलती है। सुबह निकलकर दोपहर तक गया।

वंदे भारत: सबसे तेज़ और सबसे आरामदायक

इस ट्रेन में AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार के कोच होते हैं, रास्ते में सिर्फ पाँच ठहराव हैं, और ऑनबोर्ड खानपान, वाई-फाई तथा कवच सुरक्षा प्रणाली जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। एक दिन में गया पहुँचकर उसी दिन विधि शुरू करने वालों के लिए यह सबसे उपयुक्त है।

दूसरी ट्रेनें

हावड़ा–गया एक्सप्रेस (13023/13024) रोज़ाना चलती है, लेकिन यह रामपुरहाट और भागलपुर होकर लंबा रास्ता लेती है। इसमें करीब 654 किमी की दूरी तय करने में लगभग 15 घंटे लगते हैं। इसमें स्लीपर और AC कोच दोनों हैं, इसलिए रात की यात्रा पसंद करने वालों के लिए यह ठीक है।

इसके अलावा हावड़ा–नई दिल्ली राजधानी और पूर्वा एक्सप्रेस जैसी कई ट्रेनें भी गया होकर गुज़रती हैं, क्योंकि गया जंक्शन दिल्ली–हावड़ा मुख्य लाइन पर पड़ता है।

फ्लाइट से

इंडिगो कोलकाता–गया रूट पर उड़ान भरती है। लेकिन ध्यान रखें कि एयरपोर्ट तक आना-जाना, चेक-इन और सुरक्षा जाँच जोड़ दें, तो कुल समय में वंदे भारत से बहुत ज़्यादा बचत नहीं होती। किराए में फर्क अक्सर बड़ा होता है।

सावधानी: वंदे भारत में सीटें सीमित होती हैं और पितृपक्ष में सबसे पहले यही भरती हैं। तारीख तय होते ही बुकिंग कर लें, वरना 13023 या किसी अन्य ट्रेन का विकल्प रखें।

बेंगलुरु से गया कैसे पहुँचें

दूरी लगभग 1,900 किमी से ज़्यादा • यहाँ योजना सबसे ज़रूरी है
सीधा फैसला: बेंगलुरु से गया के लिए न सीधी ट्रेन है, न सीधी फ्लाइट। सबसे व्यावहारिक रास्ता है, बेंगलुरु से पटना की सीधी फ्लाइट और आगे कैब से गया। कुल मिलाकर लगभग 7 से 8 घंटे।

क्यों कोई सीधा साधन नहीं है

बेंगलुरु से गया तक कोई डायरेक्ट ट्रेन नहीं चलती। ट्रेन से जाने पर पटना या किसी और जंक्शन पर गाड़ी बदलनी पड़ती है, और पूरा सफर करीब 47 से 48 घंटे तक खिंच जाता है। यानी दो रातें ट्रेन में। पिंडदान की तय तिथि पर पहुँचना हो, तो यह जोखिम भरा है।

तीन व्यावहारिक विकल्प

  1. बेंगलुरु → पटना फ्लाइट + कैब (सबसे अच्छा): पटना के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। पटना एयरपोर्ट से गया करीब 110 किमी है और सड़क से लगभग 3 घंटे लगते हैं।
  2. बेंगलुरु → दिल्ली या कोलकाता → गया: दो उड़ानें लेकर सीधे गया एयरपोर्ट उतर सकते हैं। कनेक्शन अच्छा मिले तो यह भी ठीक है, पर किराया ज़्यादा पड़ता है।
  3. ट्रेन से (बजट विकल्प): बिहार की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेन से पटना या दानापुर तक आएँ, फिर पटना–गया की ट्रेन या कैब लें। खर्च सबसे कम, समय सबसे ज़्यादा।
दक्षिण भारत से आने वालों के लिए सलाह: श्राद्ध की तिथि से कम से कम एक दिन पहले गया पहुँचने की योजना बनाएँ। इतनी लंबी यात्रा में एक भी कनेक्शन बिगड़ जाए तो पूरी विधि का दिन बदलना पड़ सकता है।

पुणे से गया कैसे पहुँचें

रेल दूरी लगभग 1,750 किमी • सीधी ट्रेन है, पर हफ्ते में एक दिन
सीधा फैसला: अगर आपकी तारीख ट्रेन के दिन से मेल खाती है, तो पुणे–जसीडीह एक्सप्रेस (11427) सबसे सस्ता रास्ता है। मेल न खाए, तो पुणे से पटना की फ्लाइट लेकर आगे कैब सबसे तेज़ विकल्प है।

सीधी ट्रेन

पुणे–जसीडीह एक्सप्रेस (11427) पुणे से सुबह करीब 6:40 बजे चलती है और लगभग 27 घंटे में, यानी अगले दिन सुबह करीब 9:40 बजे गया पहुँचाती है। यह ट्रेन करीब 1,748 किमी की दूरी तय करती है और आम तौर पर सप्ताह में एक दिन (शुक्रवार) चलती है। किराया लगभग ₹740 से ₹2,725 के बीच रहता है, जो श्रेणी पर निर्भर करता है।

इसके अलावा त्योहारों के समय पुणे और हडपसर से आसनसोल तथा बिहार की ओर स्पेशल ट्रेनें भी चलती हैं, जो गया में रुकती हैं। बुकिंग करते समय 0 से शुरू होने वाले नंबर ज़रूर देखें।

फ्लाइट से

पुणे से गया के लिए सीधी उड़ान नहीं है। पुणे से पटना की उड़ान लेकर आगे सड़क मार्ग सबसे तेज़ रहता है। मुंबई नज़दीक होने के कारण कुछ यात्री मुंबई से भी उड़ान पकड़ते हैं, पर उसमें पुणे से मुंबई का 3 से 4 घंटे का सफर जुड़ जाता है, इसलिए पहले पुणे से सीधी उड़ान की तुलना ज़रूर कर लें।

महाराष्ट्र से आने वाले कई परिवार मुंबई की ट्रेनों का भी सहारा लेते हैं। उनकी पूरी जानकारी यहाँ है: मुंबई से गया ट्रेन: 12322, 22357, 18610

किसी भी शहर से आइए, गया में गाड़ी हम देंगे

पटना एयरपोर्ट, गया एयरपोर्ट या गया जंक्शन से पिकअप • सभी वेदियों तक दर्शन • बोधगया • वापसी ड्रॉप

किराया जानें और बुक करें

कॉल: +91 78811 55800  |  WhatsApp करें

खर्च और समय की तुलना: 4 लोगों का परिवार, एक तरफ

नीचे का हिसाब अनुमानित है और सीज़न के हिसाब से बदलता है। पितृपक्ष में हवाई किराया सामान्य दिनों से काफी ऊपर चला जाता है, जबकि ट्रेन का किराया वही रहता है।

शहरसबसे सस्ता तरीकाअनुमानित खर्च (4 लोग)सबसे तेज़ तरीकाअनुमानित खर्च (4 लोग)
दिल्लीमहाबोधि एक्सप्रेस, स्लीपर₹2,000 – ₹2,600गया की सीधी फ्लाइट₹18,000 – ₹32,000
कोलकाताहावड़ा–गया एक्सप्रेस, स्लीपर₹1,200 – ₹1,600वंदे भारत, चेयर कार₹5,500 – ₹8,000
बेंगलुरुट्रेन, गाड़ी बदलकर₹4,000 – ₹5,500पटना फ्लाइट + कैब₹26,000 – ₹45,000
पुणे11427 पुणे–जसीडीह, स्लीपर₹3,000 – ₹3,600पटना फ्लाइट + कैब₹24,000 – ₹42,000
एक ज़रूरी बात: कैब का किराया गाड़ी के हिसाब से लगता है, यात्री के हिसाब से नहीं। इसलिए 5 या 6 लोगों के परिवार में पटना से गया की कैब प्रति व्यक्ति सिर्फ ₹500 के आसपास पड़ती है। जितने लोग ज़्यादा, प्रति व्यक्ति खर्च उतना ही कम।

हर शहर पर लागू होने वाले 6 नियम

  1. तिथि पहले तय करें, टिकट बाद में। पितृपक्ष 2026 में 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक हर दिन अलग तिथि का श्राद्ध है। पहले देखें आपके पूर्वज की तिथि किस दिन पड़ रही है, फिर उसी हिसाब से यात्रा बुक करें। पूरी सूची: पितृपक्ष 2026 तिथि लिस्ट
  2. एक दिन पहले पहुँचें। पहुँचने और विधि के दिन में एक दिन का अंतर रखें। इससे ट्रेन या फ्लाइट लेट होने पर भी विधि नहीं छूटेगी।
  3. गया की जगह आसपास के स्टेशन भी देखें। गया में टिकट न मिले तो डेहरी-ऑन-सोन, सासाराम, अनुग्रह नारायण रोड, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन या पटना तक बुक करें और आगे सड़क से आएँ।
  4. स्पेशल ट्रेनें खोजना सीखें। इनके नंबर 0 से शुरू होते हैं और ये अक्सर खाली रहती हैं। इस बार चल रही ट्रेनों की सूची: गया पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन 2026
  5. स्टेशन या एयरपोर्ट से आगे का इंतज़ाम पहले करें। मेले में गया की सड़कों पर भारी भीड़ रहती है, और रात में पहुँचने वालों को गाड़ी ढूंढने में दिक्कत होती है।
  6. ठहरने की बुकिंग सबसे पहले करें। इस बार श्रद्धालुओं के लिए करीब 2,500 बेड की टेंट सिटी भी बनाई गई है, पर मेले के दिनों में सब कुछ जल्दी भर जाता है।

गया पहुँचकर क्या-क्या करना है

गया जंक्शन से विष्णुपद मंदिर करीब 3 से 4 किमी है, जबकि गया एयरपोर्ट से यह दूरी लगभग 12 से 15 किमी पड़ती है। पिंडदान की वेदियाँ पूरे शहर में फैली हैं। फल्गु तट, विष्णुपद और अक्षयवट पास-पास हैं, जबकि प्रेतशिला और रामशिला कुछ दूर हैं और वहाँ चढ़ाई भी करनी पड़ती है।

  • पहुँचते ही पंडा जी से मिलकर विधि का क्रम और खर्च तय कर लें।
  • एक दिन के श्राद्ध में आम तौर पर फल्गु, विष्णुपद और अक्षयवट शामिल होते हैं।
  • बुज़ुर्गों के साथ हैं तो पूरे दिन के लिए गाड़ी रखें, बार-बार ऑटो ढूंढने से बचें।
  • विधि पूरी होने के बाद बोधगया ज़रूर देखें, जो गया से लगभग 12 से 15 किमी दूर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिल्ली से गया की सबसे अच्छी ट्रेन कौन-सी है?

महाबोधि सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12397/12398), जो नई दिल्ली और गया के बीच रोज़ाना चलती है और लगभग 992 किमी की दूरी औसतन 14 घंटे 15 मिनट में तय करती है।

कोलकाता से गया कितने घंटे में पहुँच सकते हैं?

हावड़ा–गया वंदे भारत एक्सप्रेस (22303/22304) से लगभग 5 घंटे 40 मिनट में। यह ट्रेन करीब 459 किमी की दूरी तय करती है और सप्ताह में छह दिन चलती है।

क्या बेंगलुरु से गया के लिए सीधी ट्रेन है?

नहीं। बेंगलुरु से गया के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है, और गाड़ी बदलकर जाने पर सफर 47 घंटे से भी ज़्यादा का हो जाता है। सबसे व्यावहारिक रास्ता पटना की फ्लाइट लेकर आगे कैब से गया पहुँचना है।

पुणे से गया की सीधी ट्रेन कौन-सी है?

पुणे–जसीडीह एक्सप्रेस (11427), जो पुणे से सुबह करीब 6:40 बजे चलती है और लगभग 27 घंटे में गया पहुँचती है। यह साप्ताहिक है, इसलिए तारीख मिलाकर ही योजना बनाएँ।

गया एयरपोर्ट पर किन शहरों से उड़ानें आती हैं?

घरेलू उड़ानें फिलहाल सिर्फ दिल्ली और कोलकाता से हैं। बाकी उड़ानें ज़्यादातर बैंकॉक, पारो और यंगून जैसे विदेशी शहरों से आती हैं, क्योंकि यह एयरपोर्ट मुख्य रूप से बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए चलता है।

पितृपक्ष में टिकट कब बुक करें?

जितनी जल्दी हो सके। पितृपक्ष की तारीखें पहले से तय रहती हैं, इसलिए महीनों पहले बुकिंग सबसे सुरक्षित और सस्ती रहती है।

निष्कर्ष

कोलकाता से गया पहुँचना सबसे आसान है, दिल्ली से सबसे ज़्यादा विकल्प मिलते हैं, और बेंगलुरु तथा पुणे से योजना बनाना सबसे ज़रूरी है। चाहे आप किसी भी शहर से आ रहे हों, दो बातें सबके लिए एक जैसी हैं: श्राद्ध की तिथि से एक दिन पहले पहुँचिए, और स्टेशन या एयरपोर्ट से आगे की गाड़ी पहले से तय कर लीजिए।

हम जल्द ही हर शहर पर अलग विस्तृत गाइड जोड़ेंगे, जिसमें उस शहर की हर ट्रेन का टाइम टेबल और किराया होगा। इस पेज को सेव कर लीजिए।

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अस्वीकरण: ट्रेनों और उड़ानों का समय, चलने के दिन और किराया कभी भी बदल सकता है। यात्रा से पहले IRCTC, NTES या संबंधित एयरलाइन से पुष्टि अवश्य करें।

Aarav Mishra
Aarav Mishra Verified Author
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Ayodhya-based travel writer and Ministry of Tourism (India) certified guide. 12+ years guiding pilgrims across the Ayodhya–Varanasi–Prayagraj Holy Triangle. Every guide is fact-checked against current temple timings and local transport before publishing.

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